स्त्री एक पूर्ण एवं महत्वपूर्ण पहचान

स्त्री एक पूर्ण एवं महत्वपूर्ण पहचान

आज के इस बदलाव भरी ज़िंदगी में लोगो की सोच काफी हद तक बदल चुकी है। आजकल बहु को बेटी जैसा कहा जाता है और हालाँकि कई घरो में समझा भी जाता है। पर इस बदलाव का ये मतलब नहीं है की हम (स्त्री) लोग अपने घर परिवार पर कम और करियर पर जयादा फोकस करते है और लोग तो ये भी कहते है की इस जिम्मेदारी से बचने के लिए हम लोग माँ बनने से कतराते है ?? Really??. ऐसा बिलकुल भी नहीं है हम कतराते नहीं बस अपनी ज़िंदगी को थोड़ी सी उड़ान और एक मजबूत पकड़ देते है।
समय कोई सा भी हो पर आज भी बच्चो की जिम्मेदारी हमेशा से ही माँ के ही पास है और होनी भी चाहिए क्यू की ये हमारा गुरुर है। इसे हम किसी को भी नहीं दे सकते। माँ बनना हमारा जहा सौभाग्य है वही खुद के लिए कुछ करना हमारा अभिमान है।
स्त्री की पहचान को परिपूर्ण कहा गया है। और हम गर्व से कहते है हम है स्त्री, सफल और काबिल माँ….

आइये इस विमेंस डे पर प्रण ले की हमारे आस पास जितनी महिलाये है वो अपनी आज़ादी से ज़िंदगी के फैसले का चुनाव कर सके।

किसी ने सही कहा है
“मंजिले उन्ही को मिलती है जिनके सपनो में जान होती है
यूँही पंख होने से कुछ नहीं होता हौसलो में उड़ान होती है।”

 

लेखिका – डॉ हिमानी श्रीवास्तवा